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आर्थिक प्रतिबंधों से टूटेगी बदनाम पाकिस्तान की कमर

  • [By: FPIndia || Published: Jul 04, 2018 21:03 PM IST
आर्थिक प्रतिबंधों से टूटेगी बदनाम पाकिस्तान की कमर
New Delhi: अपने झूठ और आतंक को बढ़ावा देने के मामले में पूरी दुनिया में बदनाम पाकिस्तान को अमेरिका की फटकार और मार दोनों झेलनी पड़ी हैं। वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) ने उसे निगरानी सूची में डाल दिया। इससे आतंकियों को पनाह देने की न सिर्फ उस पर पक्की मुहर लग गई बल्कि वह आर्थिक मदद के लिए भी तरसेगा। बौखलाया पाकिस्तान इस कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बता चुका है। पहले से ही खस्ताहाल आर्थिक व्यवस्था को करारी चोट लगेगी। वास्तव में पाकिस्तान को अपनी करतूतों को खामियाजा भुगतना पड़ा है। भारत ने पाकिस्तान को निगरानी सूची में डालने का स्वागत किया। वहीं अमेरिका ने भी साफ कर दिया कि पाकिस्तान का आतंकियों की पनाहगाह बनना बर्दाश्त नहीं है। आतंकवाद रोकने में नाकाम रहने पर अमेरिका पहले भी कई बार पाकिस्तान को आगाह कर चुका है। हालांकि पाकिस्तान ने पेरिस में एफएटीएफ की सालाना बैठक में आश्वासन दिया कि वह अगले साल जनवरी तक आतंक विरोधी कानून के तहत गैरकानूनी करार दिए गए व्यक्तियों और संगठनों की सूची जारी कर देगा। वह अपने वादे पर कितना खरा उतरेगा यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन फिलहाल उसे आर्थिक मार झेलनी होगी।
     पाकिस्तान आतंकियों को सुरक्षित पनाहगार रहा है। आतंकी संगठनों को फंडिंग रोकने में नाकाम रहने पर एफएटीएफ ने पूर्ण अधिवेशन में उसे हाल ही में ग्रे सूची में डाल दिया। इससे बचने की पाकिस्तान ने कोशिश भी की और लश्कर-ए-ताइबा, जैश-ए-मोहम्मद, हक्कानी नेटवर्क, अल कायदा, आईएस, जमात-उद-दावा व फलाह-ए-इंसानियत आदि संगठनों को फंडिंग रोकने की कार्ययोजना लागू करने के लिए 15 महीने का वक्त भी मांगा, लेकिन नाकाम रहा। पाकिस्तान के साथ ऐसा पहली बार नहीं हुआ। इससे पहले वह साल 2012 से 2015 तक ग्रे सूची में रह चुका है। पाकिस्तान पर आतंकी पनाहगाह होने का आरोप अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी लगा चुके हैं। बता दें कि दुनिया के 37 देशों ने साल 1989 में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था को मनी लांड्रिंग और आतंकी फंडिंग जेसे खतरों से बचाने के लिए इसका गठन किया गया था। ग्रे या ब्लैक सूची में आने के बाद किसी भी देश को अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से आर्थिक सहायता मिलने में परेशानी होती है। 
     पाकिस्तान को ग्रे सूची में डाले जाने का भारत ने स्वागत किया है। ग्रे सूची में आने के बाद पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था चरमरा सकती है। शेयर बाजार लुढ़क सकता है। दूसरे देशों से मदद मिलना तो दूर उसे कर्ज मिलना भी मुश्किल हो जाएगा। ऐसा होने पर वह चीन को मोहताज हो सकता है। चीन निवेश करके उसका फायदा उठा सकता है। इतना ही नहीं विदेशी कंपनियां कारोबार करने से पीछे हटेंगी और यूरोपीय देशों के निर्यात पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा। ग्रे सूची में पाकिस्तान को ऐसे वक्त पर डाला गया है जब आम चुनाव हैं। पाकिस्तान के साथ इथियोपिया, इराक, सर्बिया, सीरिया, श्रीलंका, त्रिनिडाड, टाबैगो, ट्यूनीशिया व वनातू भी ग्रे सूची में शामिल हैं।

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