समाज-मुद्दे

बेरोजगारी का हाल, 90 हजार पदों के लिए ढाई करोड़ आवेदन, भर्ती बोर्ड परेशान

  • [By: FPIndia || Published: Jun 10, 2018 13:47 PM IST
बेरोजगारी का हाल, 90 हजार पदों के लिए ढाई करोड़ आवेदन, भर्ती बोर्ड परेशान
New Delhi: सरकारी कागजों में देश के युवाओं को रोजगार मिलने का आंकड़ा भले ही कुछ भी हो, लेकिन हकीकत उतनी बेहतर नहीं दिखती। बेरोजगारों की संख्या के हिसाब से उन्हें देने के लिए नौकरियां कम हैं। इस हकीकत पर मुहर रेलवे में उमड़ रही बेरोजगारों की भीड़ को देखकर भी लग रही है। रेलवे ने ग्रुप ‘सी’ व ‘डी’ के लिए भर्तियां निकालीं। भर्ती करीब 90 हजार पदों के लिए है। एक साथ इतनी भर्ती का यह आंकड़ा कम तो नहीं है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इसके लिए ढाई करोड़ आवेदन आ चुके हैं। आवेदन करने वालों की अकल्पनीय भीड़ और शैक्षित योग्यता से भर्ती बोर्ड भी चकरा गया है, क्योंकि ग्रुप सी व डी के लिए आवेदन करने वालों में बीएसएसी, एमएससी, बीटेक, एमटेक तथा पीएचडी डिग्रीधारी आवेदकों की संख्या ज्यादा हैं जबकि पदों के लिए हाईस्कूल व आइटीआइ ही योग्यता निर्धारित है। बेरोजगारी समाज के लिए बड़ा मुद्दा है कि आखिर डिग्री लेकर भी युवाओं को क्यों भटकना पड़ता है? 
रेलवे ने निकाली 89,409 पदों पर भर्तियां
रेलवे ने मेगा भर्ती अभियान चलाया। इसके तहत इस साल ग्रुप सी व ग्रुप डी लेवल के लिए 90 हजार पदों पर भर्तियां निकालीं। इन पदों के लिए शैक्षिक योग्यता हाईस्कूल व आइटीआइ रखी गई। जिन ग्रुप की भर्तियां हैं उनमें असिस्टेंट लोको पायलट, प्वाइंट्समैन, हेल्पर, गेटमैन, फिटर, क्रेन ड्राइवर, ब्लैकस्मिथ, ट्रैक मेंटेनर, पोर्टर जैसे पद आते हैं। इन सभी पदों के लिए बेरोजगारों से आवेदन मांगे गए। आवेदनों की अंतिम तिथि 5 से 12 मार्च रखी गई थी, लेकिन यूनियनों की मांग पर तिथि को भी बढ़ाकर 31 मार्च कर दिया गया था।
मांगे थे हाईस्कूल, आवेदन किया पीएचडी तक ने
रेलवे ने ऑनलाइन आवेदनों व अधिसूचनाएं जारी करके सभी पदों पर भर्ती के लिए शैक्षित योग्यता के बारे में स्पष्ट कर दिया था, लेकिन हैरानी तब हुई निर्धारित शैक्षित योग्यता से ऊपर वालों के आवेदन भी आ गए। आवेदन करने वालो में बीएसएसी, एमएससी, बीटेक, एमटेक व पीएचडी डिग्रीधारी आवेदक शामिल हो गए। 89,409 पदों पर आवेदकों की संख्या ढाई करोड़ से ऊपर पहुंच गई। बता दें कि देश भर में रेलवे के 21 क्षेत्रीय भर्ती बोर्डों के जरिए भर्तियां होनी हैं।
मूल्यांकन प्रक्रिया में ही छूटे भर्ती बोर्ड के पसीने
रेलवे को इतनी बड़ी संख्या में आवेदनों की उम्मीद नहीं थी। अब जब आवेदन आ गए, तो डिग्रियां देखकर मूल्यांकन करने में पसीने छूट रहे हैं। दो महीने से ज्यादा हो गए, लेकिन मूल्यांकन प्रक्रिया को पूरा नहीं किया जा सका। भर्ती बोर्डों को इस बात पर मंथन करना पड़ रहा है कि इतने आवेदकों की परीक्षा कब और किस तरह कराई जाए। आवेदन चूंकि बहुत ज्यादा हैं इसलिए परीक्षा केंद्रों का इंतजाम करना भी चुनौती बना है। हालांकि परीक्षाओं के आयोजन के लिए एजेंसियों की सेवाएं लेने पर भी विचार किया जा रहा है। स्थिति  विकट है, लेकिन परीक्षा तो करानी ही होगी।

रिलेटेड टॉपिक्स