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जिंदगी बनी तमाशाः शरीयत में हराम, लेकिन ससुर ने किया बहू का हलाला

  • [By: FPIndia || Published: Aug 08, 2018 00:33 AM IST
जिंदगी बनी तमाशाः शरीयत में हराम, लेकिन ससुर ने किया बहू का हलाला Demo Pic.
-हलाला के बाद पैदा हुए बेटे को शौहर का अपनाने से इंकार
Bareilly, (UP): निकाह के बाद दहेज, तलाक और हलाला ने एक उच्च शिक्षित लड़की की जिंदगी को तमाशा बना दिया। लंबे अर्से में उसे ऐसा कोई दिन याद नहीं जब उसकी आंखों से आंसू न निकले हों। वह शर्मनाक दौर से गुजरी हलाला पर चल रही बहस के बीच यूपी में शरीयत के कायदों को तोड़कर हलाला का एक और मामला सामने आने के बाद बहस छिड़ गई है। पति ने तलाक दिया तो पीड़िता के साथ उसके ससुर ने ही एक रात की दुल्हन बनाकर हलाला किया। उसे ससुर से निकाह के लिए मजबूर किया गया। तलाक के बाद उसने इद्दत का वक्त गुजारा तभी शौहर ने उसे कई बार अपना शिकार बनाया। गर्भ के बाद बच्चे को भी गिराने की कोशिश हुई, तो उसने इसका विरोध किया। बेटा पैदा हुए 10 महीने बीत गए, लेकिन अब शौहर अपनाने को तैयार नहीं हुआ। शौहर को शक है कि पैदा हुआ बेटा उसके पिता का है। बच्चा बेगुनाह होकर भी बाप के नाम का हकदार नहीं है। शरीयत के हिसाब से शौहर और ससुर दोनों ही गुनाहगार हैं, लेकिन जिंदगी लड़की और उसके मासूम बेटे की पिस रही है। यातना में पिसकर पीड़िता के सब्र का बांध टूट गया और वह खुलकर इंसाफ के लिए सामने आ गई। बच्चे का डीएनए कराने को तैयार पीड़िता ने तय किया है कि वह सुप्रीम कोर्ट में दस्तक देगी।
     दरअसल पीड़िता रजिया खातून मुरादाबाद के बिलारी तहसील क्षेत्र की रहने वाली है। वह उर्दू से एमए है। रजिया बरेली पहुंची और महिलाओं के हक की लड़ाई लड़ रही केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी की बहन फरहत नकवी से मिली। फरहत ने इसको लेकर 6 जुलाई को प्रेस वार्ता की। पीड़िता से मुताबिक 30 सितंबर 2015 उसका निकाह संभल के एक ट्रांसपोर्टर मोहम्मद नूर के साथ हुआ था। निकाह के दो माह बाद ही उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया। ससुराल वाले दहेज में कार चाहते थे, लेकिन उन्हें बाइक दी गई। तीसरे महीने में ही शौहर ने उसे तलाक देकर जिंदगी से बेदखल कर दिया। वह अपने मायके चली गई और ससुराल वालो के खिलाफ अदालत में केस फाइल करा दिया। दबाव के चलते एक साल बाद शौहर ने बिचौलियों की मदद से दिसंबर, 2016 में समझौता कर लिया। समझौते के तहत वह ससुराल वापस आ गई।
ससुर से ही करा दिया हलाला का निकाह
पीड़िता के मुताबिक ससुराल पक्ष ने मुस्लिम धर्म के जानकारों की राय ली, तो उन्होंने बगैर हलाला उसके शौहर के साथ रहने को गलत बताया। हलाला की बात छेड़ दी गई। इसके बाद निकाह की तैयारी हुई। निकाह के वक्त जब काजी ने नाम लिया तब उसे पता चला कि जिसके साथ निकाह कराया जा रहा है वह उसका ससुर है। उसने इससे इंकार किया, तो दबाव बनाकर उसका ससुर से ही निकाह करा दिया गया। पीड़िता ने बताया कि किसी को उसके आंसुओं देखकर रहम नहीं आया। वह रातभर ससुर के साथ रही।  सुबह होते ही ससुर ने उसे तलाक दे दिया। रिश्तों के लिहाज से वह दूसरे निकाह से तलाक तक अपने शौहर की मां बनी। इसके बाद इद्दत का वक्त गुजारने के लिए उसे एक कमरा दे दिया गया। आरोप है कि इस दौरान शौहर ने उसके साथ कई बार मनमानी की। पीड़िता कहना है पैसे लेकर उसका निकाह ससुर के साथ कराया गया।
पैदा हुआ बेटा तो अपनाने से किया इंकार
पीड़िता ने आरोप लगाया कि हलाल व इद्दत के बाद वह गर्भवती हुई। उसे गर्भ गिराने की कोशिश की गई। उसने इसका विरोध किया, तो उसे बंधक बनाकर खाना-पीना भी नहीं दिया गया। किसी तरह शिकायत पर पुलिस ने आकर उसे बंधनमुक्त कराया और मायके भेज दिया गया। शौहर रखने को तैयार नहीं हुआ। उसने एक बेटे को जन्म दिया। वह दस महीने का हो गया, लेकिन शौहर ने पलटकर नहीं देखा। वह बच्चे को अपना मानने के लिए तैयार नहीं है। सब्र का बांध टूटने के बाद वह हक के लिए सामने आ गई। वह बच्चे का डीएनए कराने को भी तैयार है। पीड़िता ने इंसाफ के लिए सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे पर जाने का फैसला किया है। 
शरीयत में ससुर से हराम है बहू का हलाला
बरेली में ससुर द्वारा बहू के हलाला को लेकर सामने आए मामलों पर पहले ही जंग छिड़ी हुई है। मरकजी दारूल इफ्ता दरगाह आला हजरत के अलमा साफ कर चुके हैं कि शरीयत में ससुर से हलाला हराम है। शरीयत इसकी कतई इजाजत नहीं देती। बहू अपने ससुर पर हराम है। इसलिए हलाला नहीं किया जा सकता। यदि कोई ऐसा करता है तो वह निहायत ही गलत है। बरेली शरीफ के मौलाना शहाबुद्दीन रजवी कहते हैं कि हलाला के लिए औरत पर दबाव नहीं बनाया जा सकता। ससुर से हलाला कराना नाजायज है। ससुर के हलाला के बाद शौहर के लिए बतौर बीवी वह हराम हो गई। इद्दत के बाद भी वह उसके लिए जायज नहीं है। इद्दत के दौरान पहले शौहर का उससे मिलन भी हराम है। यह गुनाह-ए-अजीम है।
'रजिया के आंसू बेकार नहीं जाएंगे। समाज के डर से वह काफी दिनों तक चुप रही। अन्य पीड़िताओं के सामने आने से उसकी हिम्मत बढ़ी। तलाक व हलाला पीड़िताएं राज्य अल्पसंख्यक आयोग के समक्ष अपनी समस्याएं रखेंगी। शासन तक बात रखी जाएगी। रजिया के मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की जाएगी।' -फरहत नकवी, अध्यक्ष, हक फाउंडेशन.

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