समाज-मुद्दे

हुक्का बार की आड़ में नशे के अड्डे, छात्र निशाने पर

  • [By: FPIndia || Published: May 04, 2018 00:29 AM IST
 हुक्का बार की आड़ में नशे के अड्डे, छात्र निशाने पर
-सौदागरों के टॉरगेट पर होते हैं स्टूडेंट्स 
New Delhi: हकीकत चौंकाने वाली है, लेकिन युवाओं के बीच फैशन बन रहे हुक्का बार बड़े-छोटे शहरों में नशे के नए अड्डों के रूप में धड़ल्ले से चल रहे हैं। आधुनिक जीवनशैली और चकाचौंध के बीच नाबालिग और युवा जाल में उलझकर जिंदगी के कीमती वक्त को धुएं में उड़ा रहे हैं। पैसे के बदले युवाओं को ड्रग्स और शराब के साथ कई तरह के नशे का सामान परोसा जाता है। नशे का कारोबार करने वालों के लिए वह करोड़ों की कमाई का जरिया हैं। उनका मकसद ही नशे की लत लगाना होता है। वह इस फार्मूले पर चलते हैं कि स्टूडेंट्स जितना नशे का आदि होगा उनका उतना ही मुनाफा होगा। यह समाज के लिए मुद्दा भी है कि नशे के सौदागरों को छूट देकर युवाओं को आखिर किस डगर पर धकेला जा रहा है। 
    बीते सालों में हुक्का युवाओं के बीच फैशन बनना शुरू हुआ, तो सौदागरों ने इसे भुनाना शुरू कर दिया। बात फैशन तक ही नहीं रही वक्त के साथ उससे भी आगे निकल गई। बड़े शहरों में हुक्का बार अब नशे के नए आधुनिक अड्डे युवाओं व किशोरों को अपनी तरफ आकर्षित करते हैं। यह हर्बल हुक्का बार, कैफे, रेस्टोंरेट, मॉल्स, लौज और होटल की आड़ में चलाए जाते हैं। कानून के जानकार कहते हैं कि हुक्का पीना कोई अपराध नहीं है। लेकिन उसकी आड़ में नशा परोसना अपराध है। यह बात अलग है कि कई जगहों पर हुक्का बार उनके संचालकों के अलावा ड्रग माफियाओं की कमाई का बड़ा जरिया बन गए हैं। नशे के सौदागरों के टॉरगेट पर नई उम्र के स्टूडेंट होते हैं। 
कीमत के बदले मनचाहे नशे का स्वाद 
हुक्का बार में युवाओं को कई तरह के फ्लेवर के हुक्के का स्वाद चखाया जाता है। ऐसी जगहों पर कई तरह के कश होते हैं। फ्लेवर टिकिया के रूप में होते हैं। जिन्हें चिलम के बीच रखा जाता है। जैसा फ्लेवर वैसी कीमत। इनमें रोज, पान, औरेंज, मिंट, किवी, स्ट्रोरबरी, स्वीट-16 घुड़ी, फौक्स आदि फ्लेवर होते हैं। इन्हीं में तंबाकू व कैमिकल के जरिए नशा मिलाया जाता है। मसलन हुक्का फ्लेवर 100 रूपये से पांच छह सौ तक होते हैं। इनमें यदि चरस या गांजा मिलाया जाता है, तो उनकी कीमत बढ़ा दी जाती है। नशे के धंधेबाज नशे के सुरूर के किस्से सुनाकर भी युवाओं को प्रभावित करते हैं। होंठों की गोलाईयों से छल्ले निकालते युवाओं के फोटों दिवारों पर टांगते हैं। युवाओं को चरस, स्मैक, गांजा, शराब, बीयर सबकुछ परोसा जाता है। इसके लिए कीमत थोड़ा ज्यादा चुकानी पड़ती है। यदा-कदा पुलिस कार्रवाई में ऐसे नशे के अड्डों का भंडाफोड़ भी होता रहा है, लेकिन बिना पुलिस की जानकारी नशेबाज अपना धंधा चलाते हों ऐसा भी नहीं है। वैसे जरूरत सिर्फ पुलिस ही नहीं, बल्कि समाज को भी जागरूक होने की है।

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