समाज-मुद्दे

क्या भाजपा के राज में बन जाएगा भव्य राम मंदिर?

  • [By: Nitin Sabrangi || Published: Dec 09, 2018 22:56 PM IST
क्या भाजपा के राज में बन जाएगा भव्य राम मंदिर?
-धर्मसभा से भी निकली गूंज, मंदिर पर कानून बनाए सरकार
-बीजेपी व विपक्षी दलों के लिए चुनौती बनेगा वोट का गणित
New Delhi: प्रमुख दल 2019 के लोकसभा चुनाव को लेकर फिक्रमंद हैं। राजनीति के शतरंज पर शह-मात, वादों, आरोपों-प्रत्यारोपों की बाजी चल रहीं हैं, लेकिन इसके इतर राम नगरी अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की मांग करोड़ों रामभक्तों के दिलों में हिलोर ले रही है। अयोध्या से लेकर प्रयागराज और प्रयागराज से लेकर राजधानी दिल्ली तक देश के साधु-संतों और रामभक्तों की बुलंद आवाज गूंज चुकी है। बयानबाजियों का रिकॉर्ड बन रहा है। सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी को उसका वादा और जन भावनाएं बताई जा रही हैं। मामला सर्वोच्च अदालत की दहलीज पर भी है। इस सबके बीच बड़ा सुलगता सवाल है कि क्या बीजेपी के राज में राम मंदिर बन पाएगा? राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, शिव सेना, बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठन भीड़ के बड़े सैलाब के साथ अपने साफ इरादे जता चुके हैं कि उन्हें चुनाव से पहले राम मंदिर का रास्ता चाहिए। सब्र का वक्त भी गुजर चुका है। इसके लिए केंद्र सरकार पर कानून बनाने का भी दबाव है। मुद्दा इतना गरमा चुका है कि इससे पीछा छुड़ाना बीजेपी के लिए भी आसान नहीं दिखता। मुद्दे का निर्णय या तो सुप्रीम कोर्ट के मंदिर से निकलेगा या दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के मंदिर संसद की किसी एकमत ध्वनि से। विपक्षी दल इसमें अड़चन हैं, क्योंकि वह नहीं चाहते कि राम मंदिर के बहाने सत्ता का ताज बीजेपी को चला जाए। वोटों के नफे-नुकसान का गणित भी यहां पूरी तरह चुनौती बनकर काम करेगा।
     अयोध्या के बाद दिल्ली के रामलीला मैदान में विश्व हिंदू परिषद द्वारा श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण के लिए अयोजित विराट धर्मसभा में देशभर से लाखों रामभक्तों की भीड़ पहुंची। ऐतिहासिक धर्मसभा में एक सुर में राम मंदिर निर्माण की मांग गूंजी। केसरिया सैलाब था और जय श्री राम के नारों का उद्घोष। धर्मसभा में आरएसएस के सुरेश (भैय्याजी) जोशी, साध्वी ऋतंभरा, महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि, जगतगुरु हंसदेवाचार्य महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानानंद महाराज, कमलनयन दास जी, आचार्य अविचल दास, रामनंदाचार्य, व विहिप अध्यक्ष सदाशिव कोकडे, कार्यकारी अध्यक्ष आलोक गुप्ता आदि की उपस्थिति रही।
     धर्मसभा को संबोधित करते हुए भैय्याजी जोशी ने कहा कि न्यायालय की प्रतिष्ठा बनी रहनी चाहिए। जिस देश में न्यायालय में विश्वास घटता है, उसका उत्थान होना असंभव है, इसलिए न्यायालय को भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। देश पर हमला करने वालों के निशान मिटने चाहिए। हम चाहते हैं, जो भी हो शांति से हो। संघर्ष करना होता तो इंतजार नहीं करते, इसलिए सभी लोग इसमें सकारात्मक पहल करें। राम राज्य में ही शांति आती है। सब चाहते हैं राम भव्य मंदिर में रहें। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोगों का भी यही संकल्प है कि अयोध्या में राम मंदिर बनेगा। अब संकल्प पूरा करने का वक्त आ गया है। लोकतंत्र में संसद की भी जिम्मेदारी है।
सरकार को दी संसद में कानून बनाने की नसीहत
धर्मसभा में एक सुर में जन भावनाओं को सम्मान करते हुए सरकार से कानून बनाने की मांग की गई। चंपतराय ने कहा कि न्यायपालिका का धर्म है कि वो जिस देश में रहते हैं, उसके सम्मान की रक्षा करें। हमें ऐसा कानून चाहिए, जिसमें भगवान राम की जन्मभूमि व लीला भूमि हिंदूओं को प्राप्त हो। हमें बंटवारा स्वीकार नहीं है। साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि एकजुट हुए बिना हिंदुओं को उनका हक नहीं मिलेगा। वीएचपी के महासचिव सुरेंद्र जैन ने कहा कि यदि शीतकालीन सत्र में राम मंदिर को लेकर विधेयक नहीं आता है, तो प्रयाग में होने वाले महाकुंभ में होने वाली आगामी धर्म संसद में भविष्य की रणनीति तय की जाएगी। उल्लेखनीय है कि महाकुंभ में 31 जनवरी से एक फरवरी तक धर्म संसद होनी हैं, जिसमें राम मंदिर का मुद्दा प्रमुख होगा। संघ ने भीड़ जुटाकर स्पष्ट संकेत दिया है कि वह अब स्पष्ट फैसला चाहते हैं। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भी कह चुके हैं कि कानून बनाकर मुद्दे को असानी से हल किया जा सकता है। खास बात यह रही कि संसद के शीतकालीन सत्र शुरू होने के ठीक दो दिन पहले राम मंदिर निर्माण के लिए धर्मसभा हुई।
मंदिर मुद्दे का 2019 के चुनावों पर भी पड़ेगा असर
स्वामी परमानंद ने तो यहां तक कह डाला कि यदि मंदिर का निर्माण नहीं हुआ, तो बीजेपी को दोबारा सरकार नहीं बनाने देंगे। साधु-संत जिस तरह से मंदिर निर्माण को लेकर लगातार आवाज बुलंद कर रहे हैं उससे बीजेपी को जरूर कोई निर्णय लेना होगा। बीते 25 नवंबर आयोध्या में भी लाखों की भीड़ से यही पुरजोर मांग उठी। साधु-संत इस मुद्दे का समाधान चुनाव से पहले ही चाहते हैं। योग गुरू बाबा रामदेेव कह चुके हैं कि यदि बीजेपी ने कोई रास्ता नहीं निकाला, तो वह अपना विश्वास खो देगी। बीजेपी ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। इस बीच अदालत का यदि कोई फैसला आया, तो उसे भी मानना होगा। राजनीति के जानकार मानते हैं कि मंदिर मुद्दे पर सरकार के बयानों और कदमों का प्रभाव सीधे 2019 के चुनावों पर पड़ेगा। नफे-नुकसान का गणित न सिर्फ बीजेपी, बल्कि अन्य दलों के लिए भी परेशानी का सबब है। 

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