पॉजिटिव

यूपी सीएम योगी की बहन की सादगी, चाय बेचकर कटती है जिंदगी

  • [By: KN Gupta || Published: May 01, 2018 00:58 AM IST
यूपी सीएम योगी की बहन की सादगी, चाय बेचकर कटती है जिंदगी Pic: Eni News Network
-नेता बदलते हैं पीढ़ियां, उनके लिए कुछ नहीं बदला
Dehradun, (Uttarakhand): देश की राजनीति का दस्तूर कुछ ऐसा बन गया है कि घर से कोई नेता बन जाए, तो वर्तमान हालातों में तेजी से बदलाव होता है। जादूगरी अंदाज में कमाई का ग्राफ और रहन-सहन बदल जाता है। पीढ़ियों तक का भविष्य संवारने की प्लानिंग हो जाती हैं। अपना ही नहीं नाते-रिश्तेदार तक के रूतबे बढ़ जाते हैं। इतना ही नहीं उनकी गाड़ियों पर पहले पार्टी का झंडा होता है और गली-मोहल्लों से लेकर सड़कों पर कानफोड़ू सायरन भी बजते हैं। यह रूतबे को बयां करने के लिए शायद जरूरी होता है, ताकि पता चले कि किसी नेताजी का भाई-भतीजा या रिश्तेदार जा रहा है। हर जगह एक हनक दिखती है। ऐसे एक नहीं अनगिनत उदाहरण हैं। इस सबको पाने के लिए नेता एड़ी-चोटी का जोर लगा देते हैं। पैसा पानी की तरह बहाते हैं। यह भी उन्हें मालूम होता है कि सारा खर्च वह सूद समेत निकाल लेंगे। राजनीति की इस कड़वी हकीकत के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस मामले में शून्य हैं। रिश्तेदार तो दूर जिनसे उनका खून का रिश्ता है वह भी सादगी का जीवन बिता रहे हैं। उनकी सगी बड़ी बहन का दिल इतना बड़ा है कि उन्हें इस बात का कोई मलाल नहीं है। यह सकारात्मक सोच है और प्रेरणा भी।
    योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। सन्यासी हैं गृहस्थ्य नहीं। सांसारिक मोह माया से दूर हैं। भाई-भतीजावाद और परिवारवाद को लेकर योगी आदित्यनाथ की असल सोच क्या है इसके लिए किसी से सवाल पूछने की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि सच छिपा नहीं है। इसे कुछ और नजदीक से परखना हो, तो पौड़ी गढ़वाल कुठार गांव में परखा जा सकता है। जहां सीएम की बड़ी बहन शशि पयाल ने अपनी छोटी सी दुनिया बसा रखी है। बेहद खूबसूरत वादियों में सीएम की बहन एक आम जिंदगी बसर कर रही हैं। वह प्रसाद और चाय की दुकान चलाती हैं। इससे जो कमाई होती है उससे उनका गुजारा होता हैं। भाई की तरक्की के लिए दुआ तो है, लेकिन जो भाई एक बड़े प्रदेश का मुखिया है उससे किसी तरह की आर्थिक मदद की उम्मीद नहीं रखतीं। अगर किसी को मालूम न हो तो यह कह पाना बेहद मुश्किल है कि किसी सीएम की बड़े दिल वाली बहन इतने साधारण तरीके से अपनी जिंदगी बसर करती है। 
    सीएम योगी आदित्यनाथ की बहन शशि पयाल कहती हैं कि ‘‘भाई से संपर्क भले ही न हो, लेकिन अखबार और टीवी पर भाई को देखकर गर्व होता है। वह एक सीएम की बहन हैं। यह बात उनके लिए मायने नहीं रखती। संपर्क नहीं होने का भी उन्हे कोई मलाल नहीं, क्योंकि भाई सीएम के तौर पर अपने काम को बखूबी अंजाम दे रहे हैं और दुआएं हमेशा उनके साथ हैं।‘’ वह बताती हैं कि ‘‘अपने भाई से मेरी मुलाकात एक साल पहले हुई थी जब वह चुनाव प्रचार के लिए उत्तराखंड आए थे।’’ सीएम योगी आदित्यनाथ के बहनोई और शशि पयाल के पति पूरन पाल भी योगी आदित्यनाथ की इस प्रसिद्धी और उनके काम से खुश हैं। पूरन पाल कहते हैं कि ‘‘मेरे लिए यह बात मायने नहीं रखती कि वह सीएम के बहनोई हैं। योगी जी से हमारा कोई संपर्क नहीं रहता। वह समाज सेवा में लगे हैं हमें इस बात की खुशी है।’’
    शशि पायल कहती हैं कि ‘‘पर्यटक भी कई बार हमारी दुकान पर आते हैं हमें गौर से देखते हैं जबकि हम कोई अजूबा तो नहीं साधारण लोग हैं।’’ सीएम योगी आदित्यनाथ के बुजुर्ग हो चुके पिता एक रिटायर्ड फॉरेस्ट रेंजर हैं और मां का नाम सावित्री देवी। 3 बड़ी बहनों और 1 बड़े भाई के बाद सीएम योगी पांचवें नंबर की संतान हैं, जबकि उनके छोटे दो भाई और हैं। अपने कुनबे को संजोने के बजाए सीएम योगी आदित्यनाथ सन्यासी बने फिर सांसद और बाद में यूपी के सीएम। परिवार से संपर्क न के बराबर है, लेकिन परिवार को कोई टीस नहीं, क्योंकि बेटा सीएम बनकर प्रदेश को नई दिशा दिखाने का काम कर रहा है। जिस राह वह वर्षों पहले निकल गए थे उस पर लगातार चल रहे हैं। सन्यास की राह पर परिवार से मोह रहा होता योगी इस मुकाम पर नहीं होते। 

रिलेटेड टॉपिक्स