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हिंदुस्तान से मोहब्बत करती है पाकिस्तानी मलाला

  • [By: FPIndia || Published: Mar 05, 2018 22:10 PM IST
हिंदुस्तान से मोहब्बत करती है पाकिस्तानी मलाला

New Delhi: अपनी नापाक हरकतों और झूठ को लेकर पाकिस्तान पूरी दुनिया के सामने बेनकाब है, लेकिन कभी तालीबानी आतंकवादियों का शिकार बनी पाकिस्तानी लड़की मलाला यूसुफजई को आतंकवाद से नफरत है। खास बात यह है कि वह भारत की संस्कृति और मूल्यों के बारे में अधिक जानने की दिलचस्पी रखती है। वह हिंदुस्तान से भी मोहब्बत करती है और भारतीय लड़कियों के लिए काम करना चाहती है। वह सबक है पाकिस्तान के उन हुक्मरानों के लिए जो भारत के खिलाफ के खिलाफ नफरत की सोच रखते हैं और आतंक को बढ़ावा दे रहे हैं। इतना ही नहीं पाकिस्तानी आतंकी संगठन आने वाली नस्ल को ही खराब कर रहे हैं और छोटे बच्चों को भी आतंक की ट्रेनिंग दी जाती है। मलाला मोहब्बत का पैगाम देकर आइना दिखा रही है।
    नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई को पूरी दुनिया जानती है। उसने कट्टरपंथियों से लोहा लिया। बीते दिनों मलाला ने वर्ल्ड इकोनोमिक फोरम के सम्मेलन में हिस्सा लिया। मलाला काफी खुश हुईं। मलाला बहुत की पॉजीटिव है। इसको लेकर कई मीडिया रिपोर्ट्स सामने आयीं। दरअसल मलाला को भारतीय सिनेमा और ड्रामा बहुत पसंद है। वह इसकी बड़ी प्रशंसक है। भारत के बारे में वह ज्यादा से ज्यादा जानना चाहती हैं। उसका फोकस भारतीय संस्कृति और मूल्यों पर भी रहा है। वह चाहती है कि भारतीय लड़कियां अधिक शिक्षित हों। वह ‘गुलमकई’ नेटवर्क जोकि दुनिया में शिक्षा को समर्थन देने वाला संगठन है के जरिए भारत में भी इसका विस्तार करना चाहती है। मलाला को हिंदुस्तान से मोहब्बत है, इसलिए वह भारतीय सिनेमा की प्रशंसक है, संस्कृति को जाना चाहती हैं और लड़कियों के लिए काम करने का सपना है। मलाला का मानना है कि लड़कियां भविष्य हैं। लड़कियों को शिक्षा से दूर करके बेहतर भविष्य नहीं बनाया जा सकता।
    गौरतलब है कि लड़कियों के लिए अनिवार्य शिक्षा की मांग करने वाली मलाला आतंकियों के खिलाफ आवाज उठाती थी। इसके चलते 9 अक्टूबर 2012 को खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के स्वात घाटी में आतंकियों ने उसे गोली मार दी थी। गंभीर रूप से घायल मलाला को इलाज के लिए ब्रिटेन ले जाया गया जहां बामुश्किल उसे बचाया जा सका। इसके बाद वह दुनिया के लिए खास हो गई। उसे अंतरराष्ट्रीय बाल शांति व नोबेल शांति जैसे कई पुरस्कार मिले। लड़कियों की शिक्षा के अधिकार की लड़ाई में वह आगे रही। मलाला को यूरोपीय यूनियन का प्रतिष्ठित शैखरोव मानवाधिकार पुरस्कार भी दिया गया।

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