राजनीति

जाने क्या गुल खिलाएगी ‘बुआ-बबुआ’ की यह जोड़ी

  • [By: FPIndia || Published: Jan 12, 2019 15:02 PM IST
जाने क्या गुल खिलाएगी ‘बुआ-बबुआ’ की यह जोड़ी
-38-38 सीटों पर लड़ेंगी SP-BSP, कांग्रेस को दिया बड़ा झटका
Lucknow, (UP): कहा जाता है कि राजनीति में कोई स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता। भारतीय जनता पार्टी को टक्कर देने के लिए कल के दुश्मन अब दोस्त बन गए। बीस साल से ज्यादा पुरानी कड़वाहट को भुलाकर यूपी में सपा-बसपा का ऐलानिया गठबंधन हो गया है। राजधानी में बसपा सुप्रीमो मायावती व सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसकी घोषणा की। दोनों दल 38-38 सीटों पर लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे। इस गठबंधन ने रालोद को तो आईना दिखाया ही साथ ही यूपी के सहारे जीत का सपना देख रही कांग्रेस को बड़ा झटका देते हुए किनारे कर दिया। उसके लिए सिर्फ 2 सीटें छोड़ी गईं। बुआ-बबुआ की जोड़ी क्या गुल खिलाएगी यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन राजनीति के जानकारों की मानें, तो बीजेपी का चुनावी गणित प्रभावित होगा। सपा-बसपा के अलावा अन्य दल भी उसे सीधे टक्कर देंगे। सपा-बसपा गठबंधन के सामने चुनौती नतीजों के रूप में खुद को साबित करने की होगी। हालांकि बीजेपी इससे कतई विचलित नहीं है। जीत को लेकर वह पूरे जोश में है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह कह चुके हैं कि यूपी में पिछली बार हम 73 सीटें जीते थे। इस बार यह संख्या 74 होगी 72 नहीं। 
     बसपा सुप्रीमो मायावती व सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने साक्षा प्रेस वार्ता करके कहा कि बसपा व सपा यूपी की 80 सीटों में से 38-38 पर चुनाव लड़ेंगी। 20 साल से ज्यादा समय तक एक-दूसरे के दुश्मन रहे दोनों दल दोस्ती की नई डगर पर चल निकले। चुनावी सभा में यह कहने वाले कि ‘हमारी बुआ से बचकर रहना’ अखिलेश यादव ने कहा कि बीजेपी नेताओं ने मायावती जी पर अशोभनीय टिप्पणियां कीं। इन नेताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। मायावती जी का सम्मान मेरा है और उनका अपमान मेरा अपमान है। वहीं लखनऊ गेस्ट हाउस कांड को लेकर सपा से दूर हुईं बसपा सुप्रीमो मायावती ने अब कहा कि देशहित में हमने लखनऊ गेस्ट हाउस कांड को किनारे रखा है।
     खास बात यह रही कि दोनों दलों ने गठबंधन में कांग्रेस को जरा भी तवज्जों नहीं दी। उसे इससे दूर रखा गया, क्योंकि मायावती व अखिलेश को लगता है कि कांग्रेस से गठबंधन करके उन्हें घाटा होगा। हालांकि कांग्रेसी नेता कहते रहे हैं कि उन्हें कम करके ने आंका जाए। गठबंधन का दम लोकसभा चुनाव में पहली बार दिखेगा। सपा-बसपा को अपने कार्यकर्ताओं में एक-दूसरे के प्रति विश्वास जगाना होगा। इन दलों की जीत भविष्य भी निर्धारित करेगी। राजनीति के जानकार इस गठबंधन को चुनौतीपूर्ण मानते हैं। इसके भविष्य को लेकर भी आशंकित हैं, लेकिन यह भाजपा की राह को भी मुश्किल करेगा। दोनों दलों के नेता कुछ भी तर्क दें, साथ-साथ बड़ा सच यही है कि बीजेपी ने दोनों दलों को एक होने पर मजबूर कर दिया।  
 'हमने देशहित को ध्यान में रखकर एकजुट होने का फैसला किया।हमने अपने अनुभव को तवज्जो दी है। सपा-बसपा को कांग्रेस के साथ जाने से कोई खास फायदा होने वाला नहीं है। कांग्रेस के साथ जाने से हमारे वोट शेयर पर बुरा असर पड़ता है। हमारा गठबंधन नई राजनीतिक क्रांति की तरह है। हम बीजेपी को दोबारा सत्ता में आने से रोकना चाहते हैं।' -सुश्री मायावती, अध्यक्ष, बहुजन समाज पार्टी। 
'भाजपा के अहंकार का नाश करने के लिए बसपा-सपा का साथ आना जरूरी था। बीजेपी समाज में नफरत का जहर भर रही है। बीजेपी ने राज्य को जाति प्रदेश बना दिया। भुखमरी व गरीबी चरम पर पहुंच गई हैं। यूपी में बेकसूर लोगों को एनकाउंटर किया जा रहा है। जनहित में दोनों दलों का यह गठबंधन हुआ है।' -अखिलेश यादव, अध्यक्ष, समाजवादी पार्टी।

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