लखनऊ

मै किसी की बुआ नहीं, सम्मानजनक सीटों पर ही होगा गठबंधन: मायावती

  • [By: FPIndia || Published: Sep 16, 2018 18:39 PM IST
मै किसी की बुआ नहीं, सम्मानजनक सीटों पर ही होगा गठबंधन: मायावती
Lucknow, (UP): बसपा सुप्रीमो मायावती ने राजधानी में अपने 7 माल एवेन्यू स्थित नए बंगले में प्रवेश किया। इसके बाद उन्होंने मीडिया से बात कीं। प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने सबसे पहले खुद को बुआ कहकर रिश्ता जोड़ने वालों से पल्ला झाड़ा और साफ कर दिया कि वह किसी की बुआ नहीं हैं। कुछ लोग राजनीतिक फायदे के लिए उनसे रिश्ता जोड़ना चाहते हैं। उन्होंने विधानसभा व लोकसभा में भाजपा के खिलाफ होने वाले गंठबंधन पर अपना रूख साफ करते हुए कहा कि सम्मानजनक सीटें मिलने पर ही किसी दल के साथ गठबंधन होगा वरना बसपा अपने दम पर ही चुनाव लड़ेगी। साथ ही उन्होंने बीजेपी पर जमकर निशाना साधा और कहा कि भाजपा जनता का ध्यान बंटाने के लिए नए-नए तरीके अपना रही है। उन्होंने कहा कि उनकी कथनी व करनी में फर्क है इसलिए उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
     बसपा सुप्रीमो मायावती ने प्रेस कांफ्रेंस बुलाई थी। उन्होंने कहा कि कई लोग बुआ कहकर उनसे रिश्ता जोड़ रहे हैं। ऐसा करके वह राजनीतिक फायदा लेना चाहते हैं। मेरा किसी से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने यह तीखी प्रतिक्रिया इसलिए दी, क्योंकि हाल ही में भीम आर्मी के अध्यक्ष चंद्रशेखर रावण यूपी सरकार के आदेशों के बाद जेल से रिहा हुए हैं। चंद्रशेखर सहारनपुर में जातीय हिंसा भड़काने के आरोपी हैं। चंद्रशेखर ने जेल से बाहर आकर बसपा सुप्रीमो को अपनी बुआ बताते हुए कहा था कि वह भाजपा को सत्ता को उखाड़ने का काम करेंगे, लेकिन मायावती ने पूरी तरह पल्ला झाड़ लिया। उन्होंने इसे बीजेपी का गेम प्लान बताया और कहा कि ऐसे लोग दलितों के शुभचिंतक नहीं हैं। मेरा उनसे कोई लेना-देना नहीं है।
     उन्होंने भाजपा सरकार पर भी तीखा हमला बोला और जनता का ध्यान बांटने के लिए नए-नए तरीके अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने भाजपा पर ओबीसी व एससी-एसटी वर्ग से भेदभाव करने का आरोप भी लगाया। मायावती ने दो अप्रैल को एससी-एसटी एक्ट को लेकर हुए भारत बंद में प्रदर्शन के बाद जेल भेजे गए युवाओं के मामले में नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि भाजपा की कथनी व करनी में बहुत अंतर है। बसपा सुप्रीमो ने चुनावों में महागठबंधन के मुद्दे पर भी अपनी राय स्पष्ट कर दी। उन्होंने कहा कि सम्मानजनक सीटें मिलें तब किसी भी दल के साथ गठबंधन हो सकता है। गठबंधन न होने की दशा में बसपा अपने दम पर अकेले ही चुनाव लड़ेगी।
 

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