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CAG रिपोर्टः राफेल डील में मोदी सरकार ने बचाया देश का पैसा

  • [By: FPIndia || Published: Feb 13, 2019 18:16 PM IST
CAG रिपोर्टः राफेल डील में मोदी सरकार ने बचाया देश का पैसा
-पिछली सरकार के मुकाबले 2.86 फीसदी सस्ती हुई डील
New Delhi: राफेल विमान सौदे को लेकर भले ही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सहित विपक्ष लंबे समय से हंगामा मचाता रहा हो, लेकिन नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट राज्यसभा में पेश हुई, तो बड़े सच का खुलासा हो गया। रिपोर्ट में सौदे से जुड़ी जानकारियों को बिंदुवार उल्लेख किया गया। दरअसल राफेल का सौदा मनमोहन सरकार की तुलना में सस्ता रहा। मोदी सरकार में यह डील 2.86 फीसदी सस्ती रही। रिपोर्ट में बताया गया कि 126 विमान सौदे के मुकाबले भारत 17.08 फीसदी पैसों की बचत करने में कामयाब रहा। रिपोर्ट के सामने आने पर केंद्रीय मंत्री अरूण जेटली ने इसे सत्य की जीत और कांगेस के झूठ का पर्दाफाश बताया और कहा कि ‘महाझूठबंधन’ के झूठों की पोल खुल गई। सच्चाई की हमेशा जीत होती है। सुप्रीम कोर्ट ने अपनी संतुष्टि की, कैग ने अपनी संतुष्टि की, सरकार का रुख सही साबित हुआ। ऐसा नहीं हो सकता कि सुप्रीम कोर्ट भी गलत हो, कैग भी गलत हो, सिर्फ परिवार ही सही। उन्होंने 500 बनाम 1600 के उस आंकड़े पर भी सवाल उठाए जो कहीं है ही नहीं। हालांकि रिपोर्ट सामने आने के बाद भी विपक्ष के सवाल खत्म नहीं हो रहे। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने फिर सवाल उठाए। राजनीति के जानकारों का मानना है कि विपक्ष को यह बड़ा मुद्दा लगता इसलिए इस मुद्दे पर विपक्ष शांत हो जाए ऐसा नहीं दिखता। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि एनडीए सरकार का राफेल सौदा पहले की तुलना में सस्ता रहा। 
कैग रिपोर्ट की बड़ी बातें- 
मोदी सरकार की राफेल डील पिछली मनमोहन सरकार से 2.86 फीसदी सस्ती रही।
सौदे में हुई देरी की मुखय वजह तकनीकी और मूल्य मूल्यांकन में आई दिक्कत है।
रिपोर्ट में बताया गया कि 126 विमानों के लिए किए गए सौदे की तुलना में भारत ने भारत की जरूरत के मुताबिक करवाए गए बदलावों के साथ 36 राफेल विमानों के सौदे में 17.08 फीसदी रकम को बचाया।
फ्लाई अवे प्राइस (तैयार विमान) का दाम यूपीए सरकार की डील के बराबर।
कैग रिपोर्ट में 9 फीसदी सस्ती डील का मोदी सरकार का दावा खारिज हुआ।
राफेल विमान के दाम के बारे में कैग रिपेार्ट में नहीं बताया गया।
इस डील को फाइनल करने में रक्षा मंत्रालय को काफी चरणों में मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
पिछली डील में राफेल विमान की डिलीवरी 72 महीने में होनी थी, लेकिन नई डील में 71 महीने में ही डिलीवरी।
18 राफेल विमान पिछली डील के मुकाबले 5 महीने पहले ही भारत पहुंच जाएंगे।
यह भी उल्लेख है कि सीसीएस के सामने सितंबर 2016 में सोवरन गारंटी और लेटर ऑफ कम्फर्ट पेश की गई थी। जिसमें तय हुआ था कि लेटर ऑफ कम्फर्ट को फ्रांस के प्रधानमंत्री के समक्ष रखा जाएगा।
'सुप्रीम कोर्ट ने अपनी संतुष्टि की, कैग ने अपनी संतुष्टि की, सरकार का रुख सही साबित हुआ। मामला यहीं खत्म नहीं होता, लोगों को उन्हें दंडित करना होगा, जिन्होंने देश को गुमराह किया। यह 1989 की पुनरावृत्ति है। वर्ष 1980 में जब राजीव गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार भ्रष्टाचार में लिप्त थी, उन्होंने वीपी सिंह के खिलाफ सेंट किट्स रचा था अब क्योंकि मोदी जी की छवि साफसुथरी है, इसलिए एक संकट रच डालो।' -अरुण जेटली, केंद्रीय मंत्री
'मैं राफेल पर पीएम नरेंद्र मोदी से कहीं भी डिबेट करने को तैयार हूं। मैं कहना चाहता हूं कि अगर कोई घोटाला नहीं हुआ तो आप जेपीसी के गठन से क्यों डर रहे हैं। मैं विपक्ष का नेता हूं। मेरा काम है लोगों को सही जानकारी देना। राफेल की वाशिंग चल रही है। नरेंद्र मोदी अंदर से घबराए हुए हैं और जानते हैं अब कहीं न कहीं राफेल का मामला अपने अंजाम तक पहुंचेगा।' -राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष
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