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स्वाइन फ्लू से डरे नहीं, बचने के भी हैं कई रास्ते

  • [By: FPIndia || Published: Jan 22, 2019 20:55 PM IST
स्वाइन फ्लू से डरे नहीं, बचने के भी हैं कई रास्ते
New Delhi: स्वाइन फ्लू का नाम सुनते ही मन में एक डर की दस्तक होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह इंफेक्शन खतरनाक होता है। इसका शिकार व्यक्ति ही नहीं उसका परिवार भी वायरस के चपेट में आ सकता है। यह संक्रामत बीमारी है। आंकड़ों के हिसाब से बीते साल पूरे देश में 5 हजार से ज्यादा मामले सामने आए, जिनमें से करीब 470 लोगों की मौत हो गई। वास्तव में इस बीमारी से डरने से ज्यादा बचाव की जरूरत होती है। खास बात यह है कि इस बीमारी का उपचार संभव है यह तभी होता है जब समय से मरीज का उपचार शुरू हो जाए। बीमारी के पूर्ण उपचार की न केवल दवाएं हैं, बल्कि ऐसी वैक्सीन भी हैं जो एक बार लेने से पूरे साल व्यक्ति स्वाइन फ्लू के वायरस से सुरक्षित रह सकता है।
क्या है स्वाइन फ्लू और कैसे करें इसकी पहचान
स्वाइन फ्लू इन्फ्लूएंजा एच1एन1 वायरस के कारण होता है। यह सामान्य रूप से सूअरों की श्वासनली को संक्रमित करता है। इसके बाद यह वायरस इंसानों में संचारित होता है। यह नाक के जरिए गले तक पहुंचता है। साल 2009 में यह मेक्सिको में पकड़ में आया और इसने इंसानों को भी अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया। कम प्रतिरोधक क्षमता वाले स्वस्थ व लोगों को भी यह लग जाता है वैसे छोटे बच्चों व बुजुर्गों के इसकी चपेट में आने की आशंका अधिक होती है। स्वाइन फ्लू की शुरूआत शरीर में मौसमी फ्लू की तरह ही होती है। सामान्य जुकाम, सामान्य फ्लू और स्वाइन फ्लू का एकाएक अंतर कर पाना मुश्किल होता है, लेकिन नाक का लगातार बहना, सूखी खांसी, बुखार, मांसपेशियों में तेज दर्द होना, सिरदर्द, ज्यादा थकान, छींके आना, गले में खराश, नींद न आना, सीने में दिक्कत व ठंड लगना इसके प्राथमिक लक्षण हैं। रक्त परीक्षण, सीने के एक्स-रे व कुछ नमूनों के जरिए प्रयोगशाला में परीक्षण करके 20 स 30 मिनट में स्वाइन फ्लू के मरीज की पहचान हो जाती है। वैसे यह जांच किसी के 4-5 दिन तक बीमारी रहने की अवस्था में कराई जाती हैं। एंटीवायरल दवाएं व टैमीफ्लू जैसी दवाएं रोग के खतरों को कम कर देती हैं। जुकाम या मौसमी फ्लू होने पर समय से चिकित्सक के पास चले जाना चाहिए। 
शरीर में सुरक्षा कवच का काम करती है वैक्सीन
वैक्सीन हमारे शरीर में सुरक्षा कवच के तौर पर काम करती है। कई तरह के फ्लू से बचाव वाली वैक्सीन व नाक स्प्रे बाजार में मौजूद हैं जो साल में एक बार लेनी होती हैं। किसी वैक्सीन को बाजार में लाने से पहले निर्णय लेना होता है। डब्ल्ूयएचओ समेत तमाम दिग्गजों का थिंक टैंक बैठता है। वह आंकड़ों के आधार पर देखते हैं कि अगले सीजन में कौन सा वायरस खतरनाक साबित हो सकता है। उसको ध्यान में रखकर ही वैक्सीन बनाने के लिए मानकों पर खरा उतरने वाली कंपनी को कहा जाता है। 600 से 800 रूपये तक कीमत वाली वैक्सीन लेने का फायदा यह होता है कि नार्मल वायरस के अलावा जो खतरनाक वायरस है वह आपको नहीं होगा। जो व्यक्ति एक बार वैक्सीन लेगा उसे पूरी जिंदगी इसका फायदा मिलेगा ऐसा नहीं है, बल्कि हर साल यह लेना होता है। शरीर में इसका असर दो सप्ताह के बाद होता है। जब फ्लू का सीजन शुरू होता है उससे करीब एक महीने पहले यह ले लेना चाहिए। चिकित्सकों के परामर्श व क्षेत्र के हिसाब से यह तय किया जा सकता है। गर्भवती महिलाएं यदि वैक्सीन लेती हैं, तो उनके बच्चे को भी इसका फायदा होता है।
इतना खतरनाक होता है वायरस 
स्वाइन फ्लू के वायरस को खतरनाक माना जाता है। अभी तक इसके विषय में जो सामने आया है उसके मुताबिक स्वाइन फ्लू का वायरस छह फिट की दूरी से भी पकड़ सकता है। जिस व्यक्ति में यह प्रवेश करता है उसमें बीमारी के लक्षण 1 से 7 दिन में दिखते हैं। संक्रमित व्यक्ति जिन चीजों का इस्तेमाल करता है उनमें वायरस की क्या स्थिति होती है यह जानना भी जरूरी है। स्टील व प्लास्टिक के बर्तन में यह लगभग 24 से 48 घंटे, हाथों में 30 मिनट, टिश्यू पेपर में 15 मिनट व कपड़ों में 8 से 12 घंटे एक्टिव रहता है। डरने के बजाए डिटर्जेंट, साबुन, अल्कोहल, व ब्लीच के जरिए इसे समाप्त किया जा सकता है।
स्वस्थ रहने के लिए आप भी बरतें यह सावधानियां  
स्वच्छता किसी भी तरह के वायरस के खतरों को रोक सकती है।
कहीं जाते हैं, तो साबुन व पानी से हाथों को अच्छी तरह धोएं।
खांसी या छींक के आने पर अपनी नाक व मुंह पर रूमाल रख लें।
गंदे हाथों से अपनी नाक, मुंह व आंखों को छूने से बचना चाहिए।
टॉयलेट, दरवाजों के हैंडल, टेलीफोन रिसीवर आदि की सफाई रखें।
ताजे फलों, हरी सब्जियों व बिटामिन सी वाली चीजों को सेवन करें।
रात में सोने से पहले व सुबह पानी में नमक डालकर गरारे करें।
संक्रमित व्यक्ति अपने व दूसरे के लिए बरते सावधानी
संक्रमित व्यक्ति को हर समय अपना मुंह ढककर रहना चाहिए।
संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने से दूसरा भी शिकार हो सकता है।
छींकते समय द्रव कण बाहर न जाएं इसके लिए टिश्यू पेपर इस्तेमाल करें।
संक्रमित व्यक्ति के खांसते या छींकते समय सुरक्षित दूरी पर रहें।
संक्रमित व्यक्ति से मिलते समय ट्रिपल लेयर वाला मास्क खतरा कम करता है।
संक्रमित व्यक्ति को अपने संपर्क सीमित करके दवाएं लेनी चाहिए।
पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेने चाहिए व खूब पानी पीना चाहिए।

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