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कंट्रोल नहीं हुई डायबिटीज तो इंसुलिन को भी तरसेंगे करोड़ों लोग

  • [By: FPIndia || Published: Dec 19, 2018 14:31 PM IST
कंट्रोल नहीं हुई डायबिटीज तो इंसुलिन को भी तरसेंगे करोड़ों लोग

New Delhi: डायबिटीज के रोगियों की संख्या में पूरी दुनिया में तेजी से इजाफा हो रहा है। मुख्य रूप से शहरीकरण, खानपान, अनियमित जीवनशैली और शारीरिक गतिविधियों में कमी के चलते लोग इसका शिकार हो रहे हैं। दुनिया भर में टाइप 2 डायबिटीज के रोगी तेजी से बढ़ेंगे। एक दर्जन से ज्यादा शोधों में जो चौंकाने वाला आंकड़ा निकलकर सामने आया, जिसके मुताबिक दुनिया में कई देश मरीजों के संख्या बढ़ने के चलते इंसुलिन की कमी से जूझ रहे हैं। स्थिति पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो साल 2030 तक टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित इंसुलिन जरूरतमंदों की संख्या 7.9 करोड़ पहुंच जाएगी। इनमें से आधे मरीज ऐसे होंगे जिन्हें दवा नसीब नहीं होगी। इंसुलिन की कमी पहले से ही है। साल 2018 में 6.3 करोड़ जरूरत के मुकाबले उपलब्धता केवल 3 करोड़ है। अगले 12 सालों में इंसुलिन की जरूरत 20 फीसद बढ़ जाएगी। शोधकर्ता मानते हैं कि स्वास्थ्य से जुड़ी इस चुनौती के लिए बहुत सारे प्रयास करने होंगे। 

     अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल लैंसेट डायबिटीज एंड इंडोक्राइनोलॉजी में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार यदि लोगों ने अपनी जीवनशैली और खानपान में बदलाव नहीं किया, तो टाइप 2 डायबिटीज से ग्रस्त इंसुलिन जरूरतमंदों संख्या बढ़ेगी। आधे मरीजों को यह दवा उपलब्ध भी नहीं हो सकेगी। हालांकि यह भी स्पष्ट है कि सभी मरीजों को इंसुलिन की जरूरत नहीं पड़ती। टाइप 2 डायबिटीज मरीजों तथा इंसुलिन के जरूरतमंदों की संख्या का सही अनुमान लगाने के लिए आंकड़े जुटाए गए। जिसके मुताबिक साल 2018 में दुनिया में इससे पीड़ितों की संख्या 40.6 करोड़ थी। साल 2030 में यह संख्या 51.1 करोड़ होने का अनुमान है। पीड़ित सबसे ज्यादा चीन मेें होंगे। उनकी संख्या 13 करोड़ जबकि दूसरे नंबर पर भारत में 9.8 करोड़ और अमेरिका में 3.2 करोड़ होगी।
     वैज्ञानिक संभावना जाहिर करते हैं कि अगले 12 सालों में इंसुलिन की जरूरत 20 फीसद बढ़ेगी। जिस तरह से संख्या में इजाफा हो रहा है उसमें यह चिंता सताने लगी है कि मरीजों को डायबिटीज की दवाएं मिलना सुनिश्चित हो, लेकिन बढ़ती जरूरत में यह लक्ष्य पूरा होता नहीं दिखता। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता डॉ0 संयज बसु ने मीडिया को बताया कि इंसुलिन भविष्य की जरूरतों के हिसाब से नाकाफी है। आने वाले समय में इसकी मांग तेजी से बढ़ेगी। इस चुनौती के लिए बहुत सारे प्रयास करने होंगे। 

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